Hindi Chapter-1 shram vibhajan aur jati pratha

Hindi Chapter-1 shram vibhajan aur jati pratha

aaj ke post men maine Hindi Chapter-1 shram vibhajan aur jati pratha ka online test likha hai

1. भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण क्या है|
(A) सती-प्रथा
(B) दहेज-प्रथा
(C) जाति प्रथा
(D) बाल-विवाह प्रथा

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(C) जाति प्रथा

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2. आधुनिक सभ्य समाज श्रम विभाजन को आवश्यक क्यों मानता है?
(A) कार्य-कुशलता के लिए
(B) भाईचारे के लिए
(C) रूढ़िवादिता के लिए
(D) इनमें से कोई नहीं

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(A) कार्य-कुशलता के लिए

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3. ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ बाबा साहेब के किस भाषण का संपादित अंश है?

(A) द कास्ट्स इन इंडिया : देयर मैकेनिज्म
(B) जेनेसिस एंड डेबलपमेंट
(C) एनीहिलेशन ऑफ कास्ट
(D) हू आर शूद्राज

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(C) एनीहिलेशन ऑफ कास्ट

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4. भारत में बेरोजगारी का मुख्य कारण है-

(A) जाति प्रथा

(B) दहेज प्रथा
(C) अशिक्षा
(D) भ्रष्टाचार

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(A) जाति प्रथा

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5. बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का जन्म कब हुआ था?

(A) 14 अप्रैल, 1891 ई० में
(B) 20 अप्रैल, 1892 ई० में
(C) 24 अप्रैल, 1893 ई० में
(D) 28 अप्रैल, 1894 ई० में

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(A) 14 अप्रैल, 1891 ई० में

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6. ‘आदर्श समाज स्वतंत्रता, समानता, भ्रातृत्व पर आधारित होगा’ किसने कहा?
(A) मैक्समूलर
(B) भीमराव अंबेदकर
(C) बिरजू महाराज
(D) अज्ञेय

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(B) भीमराव अंबेदकर

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7. भारत में जाति-प्रथा का मुख्य कारण क्या है?
(A) बेरोजगारी
(B) गरीबी
(C) उद्योग धंधों की कमी
(D) अमीरी

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(A) बेरोजगारी

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8. ‘मानव मुक्ति के पुरोधा’ किसे कहा गया है?
(A) नलिन विलोचन शर्मा
(B) यतीन्द्र मिश्र
(C) भीमराव अंबेदकर
(D) अमरकांत

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(C) भीमराव अंबेदकर

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9. जाति-प्रथा स्वाभाविक विभाजन नहीं है क्यों?
(A) भेदभाव के कारण
(B) शोषण के कारण
(C) गरीबी के कारण
(D) रुचि पर आधारित नहीं होने के कारण

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(D) रुचि पर आधारित नहीं होने के कारण

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10. ‘भारतीय संविधान’ का निर्माता किसे कहा जाता है?
(A) मैक्समूलर को
(B) महात्मा गाँधी को
(C) भीमराव अंबेदकर को
(D) बिरजू महाराज को

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(C) भीमराव अंबेदकर को

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11. बाबा साहेब अंबेदकर का जन्म किस राज्य में हुआ था?

(A) मध्य प्रदेश

(B) बिहार
(C) उत्तर प्रदेश

(D) बंगाल

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(A) मध्य प्रदेश

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12. “श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा” के लेखक कौन हैं?
(A) भीमराव अंबेदकर
(B) रामविलास शर्मा
(C) गुणाकर मुले
(D) हजारी प्रसाद द्विवेदी

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(A) भीमराव अंबेदकर

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13. बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का जन्म किस परिवार में हुआ था?

(A) ब्राह्मण परिवार में
(B) क्षत्रिय परिवार में
(C) कायस्थ परिवार में

(D) दलित परिवार में

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(D) दलित परिवार में

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14. भीमराव अंबेदकर के चितन एवं रचनात्मकता के प्रेरक व्यक्ति कौन थे?
(A) बुद्ध
(B) कबीर
(C) ज्योतिबा फुले
(D) इनमें से सभी

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(D) इनमें से सभी

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15. ‘हू आर शूद्राज’ किनकी रचना है?
(A) भीमराव अंबेदकर की
(B) अमरकांत की
(C) महात्मा गाँधी की
(D) यतीन्द्र मिश्र की

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(A) भीमराव अंबेदकर की

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16. भीमराव अंबेदकर किसके प्रोत्साहन पर उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूयार्क गए?
(A) इन्दौर नरेश के प्रोत्साहन पर
(B) बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर
(C) मेवाड़ नरेश के प्रोत्साहन पर
(D) राजकोट नरेश के प्रोत्साहन पर

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(B) बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर

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17. ‘द अनटचेबल्स’ किनकी रचना है?
(A) महात्मा गाँधी की
(B) यतीन्द्र मिश्र की
(C) भीमराव अंबेदकर की
(D) रामविलास शर्मा की

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(C) भीमराव अंबेदकर की

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18. किसे ‘बाबा साहेब’ के नाम सें पुकारा जाता है?
(A) हजारी प्रसाद द्विवेदी को
(B) भीमराव अंबेदकर को
(C) अमरकांत को
(D) रामविलास शर्मा को

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(B) भीमराव अंबेदकर को

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19. द कास्ट्स इन इंडिया : देयर मैकेनिज्म’ किसकी रचना है?
(A) महात्मा गाँधी की
(B) भीमराव अंबेदकर की
(C) अमरकांत की
(D) गुणाकर मुले की

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(B) भीमराव अंबेदकर की

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लघु उत्तरीय प्रश्न

1. लेखक ने पाठ में किन पहलुओं से जाति प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में दिखाया है?

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मानव मुक्ति के पुरोधा एवं संविधान-निर्माता भीमराव अंबेदकर ने ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ शीर्षक निबंध में जाति प्रथा को हानिकारक प्रथा बताया है।
जाति प्रथा श्रमिकों को ऊँच और नीच में बाँट देती है। जाति प्रथा पेशा-चयन की स्वतंत्रता का गला घोंट देती है। श्रम विभाजन की दृष्टि से भी जाति प्रथा दोषपूर्ण है। यह मनुष्य की इच्छा पर निर्भर नहीं है। मनुष्य की व्यक्तिगत भावना तथा व्यक्तिगत रुचि का इसमें कोई स्थान या महत्त्व नहीं रहता। आर्थिक पहलू से भी जाति प्रथा हानिकारक है, क्योंकि लोग रुचि के साथ काम नहीं करते। यह प्रथा मनुष्य की स्वाभाविक प्रेरणा रुचि व आत्मशक्ति को दबाकर उन्हें अस्वाभाविक नियमों में जकड़कर निष्क्रिय बना देती है।

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2. सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने किन विशेषताओं को आवश्यक माना है?

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भीमराव अंबेदकर का मानना है कि सच्चा लोकतंत्र स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व पर आधारित होना चाहिए। लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति ही नहीं है, लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवनचर्चा की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है। ऐसे समाज के बहुविध हितों में सबका भाग होना चाहिए, तथा सबको उनकी रक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए अर्थात् एक-दूसरे के प्रति श्रद्धा व सम्मान का भाव हो।

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3. लेखक के अनुसार आदर्श समाज में किस प्रकार की गतिशीलता होनी चाहिए?

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लेखक भीमराव अंबेदकर के अनुसार किसी भी आदर्श समाज में इतनी गतिशीलता होनी चाहिए जिसमें कोई भी वाक्छित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक संचारित हो सके। ऐसे समाज में बहुविध हितों में सबका भाग होना चाहिए तथा सबको उनकी रक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए।

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4. भीमराव अंबेदकर किस विडम्बना की बात करते हैं?

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लेखक भीमराव अंबेदकर का मानना है कि हमारे आधुनिक सभ्य समाज में भी जातिवाद के पोषकों की कमी नहीं है। इसके पोषक श्रम विभाजन का आधार जाति प्रथा को मानते हैं। उनका कहना है कि हमारे इस समाज में ‘कार्य-कुशलता’ के लिए श्रम विभाजन आवश्यक है और जाति प्रथा भी श्रम विभाजन का दूसरा रूप है। इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है। जबकि जाति प्रथा का दूषित सिद्धांत मनुष्य के प्रशिक्षण अथवा निजी क्षमता का विचार किये बिना गर्भधारण के समय से ही मनुष्य का पेशा निर्धारित कर दिया जाता है।

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5. कुशल व्यक्ति या सक्षम श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए क्या आवश्यक है?

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कुशल व्यक्ति या सक्षम श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए यह आवश्यक है कि हम व्यक्तियों की क्षमता इस सीमा तक विकसित करें जिससे वह अपने पेशा या कार्य का चुनाव निजी क्षमता और योग्यता के आधार पर कर सके।

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6. जाति प्रथा भारत के बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है?

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‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ में भीमराव अंबेदकर ने लिखा है कि जाति प्रथा पेशे का दोषपूर्ण पूर्व निर्धारित ही नहीं करती बल्कि मनुष्य को जीवनभर के लिए एक पेशों में बाँध भी देती है। भले ही पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त होने के कारण वह भूखों मर जाए । प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मनुष्य को अपना पेशा बदलने की स्वतंत्रता न हो तो भूखे मरने के अलावा क्या रह जाता है । इस प्रकार पेशा परिवर्तन की अनुमिति न देकर जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है ।

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7. लेखक भीमराव अंबेदकर आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या किसे मानते हैं और क्यों?

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डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या “असमानता (inequality)” और “संगठित श्रमिकों की कमी है। जाति प्रथा द्वारा श्रम विभाजन को मानते है क्योंकि बहुत से लोग ‘निर्धारित’ कार्य को ‘अरुचि’ के साथ केवल विवशतावश करते हैं। जिससे मनुष्य में टालू काम और कम काम करने की प्रवृत्ति आ जाती है।

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8. भारतीय समाज में जाति श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती?

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भीमराव अम्बेदकर ने ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ शीर्षक निबंध में भारत में व्याप्त जाति प्रथा की निन्दा की है।
जाति प्रथा भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वभाविक रूप नहीं कही जा सकती है क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है। यह प्रथा पेशे की स्वतंत्रता का गला घोंट देती है। यह एक दूषित सिद्धांत है जो मनुष्य के प्रशिक्षण अथवा उसकी निजी क्षमता का विचार किए बिना गर्भधारण के समय से ही मनुष्य का पेशा निर्धारित कर देती है।

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9. डॉ० भीमराव अम्बेदकर के अनुसार किसी कार्य में दक्षता प्राप्त करने के लिए क्या अनिवार्य है?

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डॉ० भीमराव अम्बेदकर के अनुसार किसी कार्य में दक्षता प्राप्त करने या कुशल और सक्षम श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए यह आवश्यक है कि हम व्यक्तियों की क्षमता इस सीमा तक विकसित करें जिससे वह अपने पेशा या कार्य का चुनाव अपने से कर सकते है ।

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https://www.youtube.com/@Pankajstudycentre

Padha huaa yad kaise rakhen

         mujhe ummid hai ki   Hindi Chapter-1 shram vibhajan aur jati pratha ka online test de chuke honge                                       

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